पौराणिक इतिहास
🔹 भगवान श्रीराम और रामेश्वरम

- रामेश्वरम को भगवान श्रीराम और भगवान शिव से जुड़ा प्रमुख तीर्थ माना जाता है।
- रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद अपने पाप धोने के लिए यहाँ शिवलिंग की स्थापना की।
- इस शिवलिंग को रामनाथस्वामी कहा गया।
- रामेश्वरम को धार्मिक दृष्टि से दक्षिण का मथुरा और काशी भी कहा जाता है।
🔹 राम सेतु (Adams Bridge)
- पौराणिक कथा अनुसार श्रीराम ने सुग्रीव और वानरों की सहायता से लंका जाने के लिए समुद्र पर पुल बनाया।
- इसे रामसेतु या आदम्स ब्रिज कहा जाता है।
- यह सेतु आज भी समुद्र में पत्थरों की एक श्रृंखला के रूप में दिखाई देता है।
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2. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
- रामेश्वरम प्राचीन समय से एक प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है।
- यह स्थान वाणिज्य और समुद्री यात्रा का केंद्र भी माना जाता था।
- यहाँ का रामनाथस्वामी मंदिर 12वीं शताब्दी में पांड्य और चोल राजवंशों द्वारा पुनर्निर्मित और विकसित किया गया।
3. रामनाथस्वामी मंदिर का इतिहास
- मंदिर का निर्माण चोल और पांड्य राजाओं द्वारा करवाया गया।
- मंदिर की दीर्घ गलियाँ और नक्काशीदार स्तंभ प्राचीन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- मंदिर की संरचना में धार्मिक अनुष्ठान और तीर्थ यात्रा की सुविधा को ध्यान में रखा गया।
- यह मंदिर भारत के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में से एक माना जाता है।
4. रामेश्वरम का धार्मिक महत्व
- चार धाम यात्रा का हिस्सा
- दक्षिण भारत में चार धामों में रामेश्वरम को महत्वपूर्ण माना जाता है।
- संकट मोचन और पुण्य स्थल
- श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ स्नान और पूजा करने से भक्तों के पाप क्षम होते हैं।
- आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
- रामेश्वरम और तटवर्ती क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शक्तिशाली माना जाता है।
🕉️ सारांश
- रामेश्वरम भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग और राम सेतु के कारण पवित्र स्थल है।
- रामनाथस्वामी मंदिर धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह स्थान भक्तों के लिए पुण्य, मोक्ष और आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र है।